बुधवार, 25 मार्च 2020

वराह अवतार के कथा ( अग्निपुराण - चौथा अध्याय)

अग्निदेव कहते हैं - वशिष्ठ! पूर्वकाल में " हिरण्याक्ष" नामक दैत्य असुरों का राजा था। वह देवताओं को जीतकर स्वर्ण में रहने लगा। देवताओं ने भगवान विष्णु के पास जाकर उनकी स्तुति की। तब उन्होंने यज्ञवाराह रूप धारण किया और देवताओं के कण्टक रूप उस दानव को दैत्य सहित मारकर एवम् देवताओं आदि की रक्षा की । उसके बाद भगवान श्रीहरि अन्तर्धान हो गये॥ १- ५ ॥

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